Friday, January 31, 2020
भटका हुआ गोपाल
Friday, January 10, 2020
रज्जो की शिकंजी और फिल्मी नचनिये..
Saturday, December 14, 2019
अफजल का गम
Thursday, November 7, 2019
न्यायमन्दिर के पंडे
Tuesday, November 5, 2019
दिल्ली पुलिस बनाम विधि व्यवसायी
Wednesday, October 9, 2019
सेकुलरिज्म
अजान दो, खुल कर दो..मस्जिद से दो, मंदिर से दो, पूजा पण्डाल से दो, गौशाला से दो, अस्तबल से दो, शूकर बाड़े से दो..हमें कोई ऐतराज नहीं।
यह सेक्युलर भारत है, सबको बराबर की आजादी है। जिसका जहां मन करेगा वहां नमाज पढ़ेगा, जहां से मन करेगा अजान देगा, जहां मन करेगा, कुर्बानी देगा. इसमें किसी को कोई परेशानी नहीं।
लेकिन एक शंका है। जो अक्सर तुम गंगा-जमुनी तहजीब की बात कहते हो, उसमे ये दोनों नदियां ही हैं न.? तो तय कर लिया है तुमने, कि तुम कौन वाली नदी हो.? तुम गंगा हो या यमुना.? तुम ही बता दो पहले तो ठीक रहेगा, काहे से कि जो बचेगा हम उसी को मान लेंगे कि हम वही हैं।
लेकिन फिर एक दिक्कत होगी। अगर जो बचेगा वह हम होंगे, तब यह भी तय हो जायेया कि हम भी हैं। और अगर हम भी होंगे तब तो बिना हमारे यह संस्कृति दजला-फरात वाली ही हो जायेगी। वैसे दजला-फरात वाली भी कहीं से तुम्हारी नहीं थी, क्योंकि तब तो तुम पैदा भी नहीं हुए थे। खैर, अब तो तुम पूरी दुनियां को ही अपनी जागीर समझते हो.!
भूल गया था (यह भी तुम्हारी संगत का असर है जो हम खुद को सदियों तक भूले रहे), बात हो रही थी कि गंगा-जमुना में हम कौन हैं.? या दोनों ही तुम हो.? तुम ही तुम..केवल तुम.!
अगर हमें भी हमारी पहचान बचाये रहने देने की कृपा करो तो मेरी इल्तिजा है कि बराबरी के सिद्धांत के अनुसार हमें भी इजाजत दो कि हम भी मस्जिद भांगड़ा कर सकें, वहां भंडारा कर सकें, वहां कीर्तन कर सकें, शंख बजा सकें..
लेकिन तुम्हें यह सब पसन्द नहीं आयेगा और हो सकता है कि मेरी इस हिमाकत के बदले तुम मेरी गर्दन ही कतर डालो। क्योंकि गर्दन कतरना तुम्हारी फितरत है, बहुतों की कतर चुके हो, तो मेरी क्या औकात.? पर..तुम्हें अपने ही खुदा का वास्ता..ये सेक्युलरिज्म का फर्जी पाठ पढ़ाना बंद कर दो प्लीज..
दुर्गा-पूजा पण्डाल में नमाज/अजान देना जायज और नुसरत जहां का वहां जाना गैर-इस्लामी.! इतनी बेशर्मी लाते कहां से हो यार.?!
Friday, June 7, 2019
रमजान और शांतिदूत और हम
ढाई साल की मासूम बच्ची ट्विंकल शर्मा को रमजान के पाक(?) महीने में एक शांतिदूत रोजेदार मुहम्मद जाहिद ने बलात्कार कर मार दिया। उसकी आंखें नोचकर निकाल लीं, उसके हाथ पैर काट दिये, उसके गुप्तांगों में चाकू से वार किये, उसका पेट फाड़ दिया..फिर उसके शव को कुत्तों के खाने के लिए फेंक दिया।
विश्वास नहीं होता कि कोई मनुष्य इतना वीभत्स आचरण कैसे कर सकता है.? लेकिन वह तो मनुष्यता से ऊपर उठ चुका था, शांतिदूत था न..
ट्विंकल की पीएम रिपोर्ट के कुछ प्रमुख बिंदु उस शांतिदूत जाहिद द्वारा मासूम ट्विंकल के साथ किये गये पैशाचिक आचरण को स्वतः स्पष्ट करते हैं-
⭕ बच्ची के शरीर मे छोटी व बड़ी आंत मिली ही नहीं।
⭕ बच्ची के शरीर मे किडनी मिली ही नहीं।
⭕ यूरिनरी ब्लैडर मिला ही नहीं।
⭕ जेनिटल्स मिले ही नहीं।
⭕ बच्ची की आंखें थी ही नहीं।
⭕ बच्ची के हाथ-पैर उसकी मृत्यु से पूर्व ही काटे गये थे।
यह सिर्फ और सिर्फ मजहबी कट्टरता से परिपूर्ण जघन्य अपराध है जिसकी जड़ में इन शन्तिदूतों के अंदर बैठी हिन्दू विरोधी मानसिकता है, लेकिन हमारे देश का मेन स्ट्रीम मीडिया मौन है। क्यों.? क्योंकि हत्यारा शांतिदूत कौम का है और बच्ची हिन्दू है। हमारी तथाकथित सेक्युलर मीडिया के लिये सेक्युलरिज्म हिंदुओं के विरुद्ध शांतिदूतों द्वारा किये जा रहे इन अपराधों से बढ़कर है, इसीलिये ऐसे हर मौके पर मीडिया मुंह फेरकर बैठ जाता है। यही मीडिया गुड़गांव में एक शांतिदूत को थप्पड़ मारने और पिटाई की झूठी कहानी को प्राइम टाइम स्लॉट देकर हफ्ते भर चलाकर हिंदुओं को असहिष्णु दिखाकर उन्हें अपराधबोध से ग्रस्त करने में लग जाता है।
सोचने वाली बात यह भी है कि शन्तिदूतों द्वारा हिंदुओं के प्रति ऐसी जघन्य अपराधों की संख्या निरन्तर बढ़ती जा रही है। देखना है कि हिन्दू समाज कब चेतेगा और एकजुट होकर ऐसे हिन्दू विरोधी आचरण व अपराधों के विरुद्ध मुखर प्रतिक्रिया देगा.?
सरकार, पुलिस, प्रशासन और न्यायपालिका तो घटना हो जाने के बाद ही कुछ कर सकते हैं। हिन्दू समाज की ओर से आने वाले त्वरित तीखे प्रतिकार का भय ही ऐसी घटनाओं को घटित होने से रोक सकता है। मुर्गे और बकरी आदि मारकर इसीलिये खाये जाते हैं क्योंकि वे प्रतिकार नहीं करते। शेर और बाघ को मारकर इसलिये नहीं खाया जाता क्योंकि वे प्रबल प्रतिकार करते हैं। हम बकरी से शेर कब बनेंगे, देखना है।