Sunday, February 27, 2022

साबरमती कोच S-6 और गोधरा के शांतिदूत..

आज 27 फरवरी है..

आज से ठीक 20 साल पहले 27 फरवरी 2002 को सुबह-सुबह 7:43 बजे गुजरात के गोधरा स्टेशन से साबरमती_एक्सप्रेस नाम की एक ट्रेन रोज की तरह गुजरी थी,भारतीय रेल की परंपरानुसार चार घंटे लेट। लेकिन वह सुबह रोज की तरह नहीं थी.. गोधरा स्टेशन से निकलते ही ट्रेन पर पथराव किया गया, ट्रेन धीमी हुई और अगले सिग्नल पर पंहुचते ही करीब दो हजार शांतिदूतों लोगों ने इसे घेर लिया।

साबरमती रुक गई। पहले से तैयार तेल में डुबोये बोरे उसके S-6 कोच में दरवाजों से अन्दर डाल दिए गए। दरवाजों को तार से बांधकर बंद कर दिया गया, फिर आग लगा दी गई। सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार कोच में 27 महिलाओं और 10 बच्चों सहित कुल 59 लोग जल कर मरे थे, इनके अतिरिक्त 48 लोग घायल हुए थे।

सरकार ने इस नृशंस कांड की जांच के लिए नानावटी_शाह_कमीशन का गठन किया था, जिसका कार्यकाल 22 बार बढ़ाया गया-2002 से 2014 तक.. इसके बाद भी 2014 में इस कमीशन की रिपोर्ट आधी-अधूरी ही आई थी, क्योंकि कमीशन ने खुद अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि "बार-बार बुलाने के बावजूद मामले से सम्बन्धित बहुत सारे लोग कमीशन के सामने आए ही नहीं..!"

लंबी सुनवाई के बाद एसआईटी कोर्ट ने 2011 में 63 आरोपियों को बरी करते हुए 20 दोषियों को उम्रकैद और 11 शांतिदूत हत्यारों- 
1. हाजी बिलाल इस्माइल, 
2. अब्दुल मजीद रमजानी, 
3. रज्जाक कुरकुर, 
4. सलीम उर्फ सलमान जर्दा, 
5. जबीर बेहरा, 
6. महबूब लतिका, 
7. इरफान पापिल्या, 
8. सोकुट लालू, 
9. इरफान भोपा, 
10. इस्माइल सुजेला और 
11. जुबीर बिमयानी 
को मृत्युदंड की सजा सुनाई, लेकिन 9 अक्टूबर 2017 को गुजरात हाईकोर्ट ने इन 11 के मृत्युदंड को भी उम्रकैद में बदल दिया। 27 महिलाओं और 10 बच्चों सहित 37 मासूमों की नृशंस हत्या के इस मामले में किसी भी दोषी को फांसी की सजा नहीं हुई। 

यहां स्वाभाविक सवाल बनता है, कि पूरी ट्रेन के सिर्फ एक कोच S_6 को ही आग क्यूं लगाई गई.? जवाब है- क्योंकि इस कोच में अयोध्या से कारसेवा कर वापस लौट रहे हिंदू सवार थे।

सोचिएगा और हो सके तो एक बार महसूस करके देखिएगा भी, कि जरा सी रोटी की भाप से अपनी एक उंगली जल जाए तो कितना दर्द होता है.? फिर जो उस बंद कोच में भयानक आग और धुएं से मरे होंगे, वो कितना तड़पे होंगे.?

अगर आपने वह भयावह दृश्य देखा होता, तो क्या प्रतिक्रिया होती आपकी.? किस सोच के साथ, क्या निश्चय, क्या प्रतिज्ञा करके उस कोच से उतरते आप.? पर आप तो वहां थे ही नहीं, न ही आपने उस कोच का नारकीय दृश्य देखा ही था.. लेकिन, नरेंद्र मोदी उस कोच में गए भी थे और वापस आते समय उन्होंने कुछ प्रतिज्ञाएं भी की थीं। 

तो.. सरकारों की खूंटी पर अपने तंग कपड़े टांग कर बिस्तरों पर फैलना बंद करिए और देशहित के लिए प्रतिज्ञाबद्ध प्रथम राष्ट्रवादी सरकार का सहयोग करिए। क्योंकि कोई भी सरकार या कानून अपना काम तभी बेहतर करता है, जब समाज और समाज का हर व्यक्ति अपना काम बेहतर करे। उस समय न सही अब प्रतिज्ञा करिए कि तन-मन-धन से अपनी सरकार का साथ देंगे.. ऐसा भारत बनाने में, जिसमें कोई शांतिदूत फिर ऐसा करने क्या सोचने की भी हिमाकत न कर सके..

गोधरा कांड में मृत सभी सनातन हुतात्माओं को अश्रुपूर्ण_श्रद्धांजलि 😭🌺

जयहिंद, जय_श्रीराम 🙏

Saturday, February 19, 2022

मोहल्ले का सैलून और मोदी..

आज संडे था, तो हम हुलिया सुधरवाने मोहल्ले के सैलून जा पहुंचे..

नाई ने पहले मुंह पर पानी का फुहारा मारा, फिर क्रीम लगाकर मालिश की.. उसके बाद तौलिये से रगड़ कर मुंह साफ किया, फोम लगाया, रेजर में नया ब्लेड लगाया, शेव की, मूंछें और भवें सेट कीं, बढ़िया आफ्टर शेव लोशन लगाया, बोरोलीन पोता, फिर आखिर में हल्का सा पाउडर  फाइनल टच दिया..

हमने कहा "जरा नाक के बाल निकाल दे.." उसने साथ में कान पर खड़े दो चार बालों पर भी कैंची फिरा दी। फिर हम बेशर्मी से बनियान उतार कर खड़े हो गये.. हाथ ऊपर उठाया, उसने बगल के भी बाल साफ कर दिये। उसके बाद उसने कंधे-पीठ पर हाथ मारा और थोड़ी देर मालिश भी कर दी.. 

हम अनमने से उठे, शीशे में आगे-पीछे कई एंगल से खुद को निहारा.. रितिक रोशन बनने में कुछ कमी सी लग रही थी, वो संशकित हमें घूर रहा था। शीशे के सामने कई बार अगवाड़ा-पिछवाड़ा ऐंठने के बाद आखिरकार हमें कमी मिल ही गई- मूंछ में दो बाल सफेद दिख रहे थे.. उन्हें भी निकलवाया और फाइनली पचास रुपया उसके हवाले करके यह सोचते हुए घर की राह ली कि "साली महंगाई कितनी बढ़ गई है, जरा सी दाढ़ी के पचास रुपये.?!

सोचिये कि उसने हमारे पचास के नोट के बदले कितना कुछ किया.? जबकि बात तो सिर्फ दाढ़ी बनाने की हुई थी, नाक, कान, बगल के बाल साफ करने और मालिश की बात तो नहीं हुई थी न.? 

अब गंभीरता से सोचिये कि एक वोट के बदले आपके लिये क्या-क्या नहीं किया गया.? वादा तो सिर्फ राम मंदिर, 370 और समान नागरिक संहिता का था न.? पर उसने तो-

•ईरान का ₹ 48,000 करोड़ ऋण चुकाया,
•संयुक्त आरब अमीरात का ₹ 40,000 करोड़ ऋण चुकाया,
•भारतीय ईंधन कंपनियों का ₹ 1,33,000 करोड़ घाटा पूरा किया,
•इंडियन एयरलाइंस का ₹ 58,000 करोड़ घाटा पूरा किया,
•भारतीय रेलवे का ₹ 22,000 करोड़ घाटा पूरा किया,
•बीएसएनएल का ₹ 1,500 करोड़ घाटा पूरा किया,
•देश का ₹ 2,50,000 करोड़ का विदेशी कर्ज ब्याज के साथ चुकाया,
•सेनाओं को आधुनिक संसाधन देकर उन्हें विश्वस्तरीय बनाया,
•18,500 गांवों का विद्युतीकरण कराया,
•गरीबों को 8 करोड़ निःशुल्क गैस कनेक्शन दिया,
•हजारों किलोमीटर नई सड़कें बनाईं,
•युवाओं को ₹ 1,50,000 करोड़ के ऋण दिये,
•आयुष्मान भारत में 50 करोड़ नागरिकों के लिए ₹1,50,000 करोड़ की वैद्यकीय बीमा योजना आरंभ की,
•राम मंदिर भी बनवाया,
•370 भी हटाई,
•कश्मीर को केंद्रशासित कर दिया, •लद्दाख को अलग कर दिया,
•पाकिस्तान की हालत खजैले कुत्ते जैसी कर दी,
•CAA लागू किया,
•ढाई लाख रुपये मकान बनाने को दिया,
•घर घर शौचालय बनवाया,
•मुफ्त के सिलेंडर दिये,
•किसान कर्जमाफी कर के देश की इकोनामी को खतरे में डाला, किसी का तुष्टीकरण नहीं किया। भले लाखों कार्यकर्ता नाराज हुए, पर भाई भतीजावाद नहीं किया।
•इसके अतिरिक्त NRC और NPR समेत देश और नागरिकों के हित में अनेक कल्याणकारी योजनाओं पर काम चल रहा है..

लेकिन हमारे मन में गुस्से से बार-बार एक ही सवाल उठता है- "साला क्या जमाना आ गया है, एक वोट के बदले बस इत्ता सा ही.?! कुछ भी तो नहीं किया मोदी ने..."

कितने बेशर्म हैं हम, पता नहीं कब सुधरेंगे.?! 😡

Friday, February 18, 2022

बैशाख_नंदिनी

आप रास्ते से जा रहे हैं और अचानक सामने एक गधा खड़ा खिलखिलाता दिख जाये, तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी.? शायद आप कहें- "अरे वाह, गधा भी हंस रहा है.!" या गधे को हंसता देख आप भी खिलखिला उठें, या दुखी हो जाएं कि "देखो, हमसे अच्छा तो ये ही है, खुश तो है.!" 

लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे। हम तो मौके का फायदा उठा कर तुरंत गधे के चार दांत उखाड़ लेंगे, क्योंकि अगर गधे के दांत का चूरन बना उसका ताबीज बांधा जाये, तो पौरुष शक्ति में चमत्कारी वृद्धि होती है। अब आप कहोगे कि ऐसा चमत्कार कभी सुने नहीं हैं.. तो भाई, बंगाली बाबाओं की फलती फूलती दुकानदारी और निर्मल बाबा के भक्तों की संख्या देखकर भी आपको क्यों नहीं लगता कि हमारा फार्मूला भी चल सकता है.?

खैर.. यह तो शरद जोशी जी से प्रेरित मेरी कल्पनाशक्ति की आकस्मिक उड़ान थी आपके मुखड़े पर मुस्कान (कर्नाटक वाली नहीं) लाने के लिये, अब गधे पर गंभीर चर्चा..

दुनिया में गधों की दूसरी सबसे ज्यादा आबादी पाकिस्तान में है। आप फिर कहोगे कि इसमें तो पाकिस्तान पहले नंबर पर है.. लेकिन आप गलत हैं, क्योंकि दुगोड़ू_गधों को मिलाकर अब हम पाकिस्तान को कहीं पीछे छोड़ चुके हैं.. 

अंग्रेजी में जवान गधे को Jack और जवान खूबसूरत गधी को Jenny या Jennet कहते हैं। जिनको गधी के Jenny या Jennet नाम अजीब लगें, उनको गधी को शांतिदूतों की नजर से देखना चाहिये.. लिल्लाह, गधी हूर नजर आयेगी और आसमानी किताब के सदके गधी से इश्क हलाल भी होगा।

हां, तो गधा समाज की चर्चा आगे बढ़ाते हैं.. गधे और घोड़ी के समागम से एक नई नस्ल जन्मती है, जिसे खच्चर कहते हैं। खच्चर देखने में थोड़ा घोड़ा भले लगे, पर होता ये नल्ला टाइप गधा ही है। अक्सर इसे गधों के दल की सरदारी मिल जाती है और यह अपने गधे साथियों के साथ बेवजह ढिंचुआ कर आसपास के लोगों की नींद हराम करने में भी माहिर होता है।

इस खच्चर की एक बहिन भी होती है और असल में यह पूरी पोस्ट उस खच्चर_भगिनी का परिचय करवाने के उद्देश्य से ही लिखी गई है। अंग्रेजी में उसे Hinny और देशी ठर्रा भाषा में खच्चरिया कहते हैं। अब इस Hinny के नाक_होंठ भले ही घोड़ी जैसे दिखें, पर होती ये गधी ही है। चूंकि हम भारतीय पत्नीभय से चुपचाप डिस्कवरी चैनल की जगह एकता कपूर के 'कैसी दुल्हन जो पति को डराये..' टाइप के टीवी सीरियल देखते रहते हैं तो गधी, घोड़ी, घुड़खर और खच्चर वगैरह में आसानी से फर्क नहीं कर पाते हैं। ठीक है, गृहशांति का ध्यान रखिये और चैनल मत बदलिये। लेकिन फर्क करना जरूर सीखिये, कि कल जीवन या देश की महत्वपूर्ण घुड़दौड़ में आप घोड़े के धोखे में खच्चर या खच्चरिया पर दांव न खेल जाएं..

उद्देश्य सिर्फ आपको वाइल्ड_लाइफ पर थोड़ा जागरूक करना था। इस पोस्ट को पप्पू और उसकी बहिनजी से मत जोड़ियेगा, प्लीज.. 🙏

वैसे जोड़ भी लेंगे, तो मुझे क्या.?! 😜

Sunday, September 26, 2021

कुकुरमुत्ता पार्टियां और कांग्रेस का प्रपंच

यूपी में अगले साल चुनाव हैं और हर चुनाव के समय तमाम पार्टियां कुकुरमुत्तों की तरह पैदा हो जाती हैं। आज चर्चा उस कुकुरमुत्ता_पार्टी की जिसे हमारे यहां के गिद्ध टाइप बुद्धिभोजी और लिब्रान्डू मीडिया सेक्युलर बताते नहीं थकते हैं।

हम बात कर रहे हैं भारतीय मुसलमानों के स्वयंभू_खलीफा असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की, जिसके नाम से ही जाहिर है कि यह पार्टी किनके लिये है और कितनी सेक्युलर को सकती है।

चलिये, इस सेक्युलर(?) पार्टी के बारे में कुछ तथ्य जान लेते हैं-

एआईएमआईएम की स्थापना आज से 92 साल पहले नवंबर 1927 में हुई थी। यह पार्टी हैदराबाद को एक आजाद इस्लामिक_रियासत के रूप में भारत से अलग करने की पक्षधर थी, संभवतः इसीलिये स्वतंत्र भारत में हैदराबाद रियासत का विलय होने के बाद आंध्र प्रदेश में यह पार्टी राजनीतिक दृष्टि से मृतप्राय हो गयी और इसे एक भी सीट नहीं मिली।

यह स्थापित सत्य है कि स्वतंत्रता के बाद लम्बे अरसे तक लगभग सम्पूर्ण भारत में कांग्रेस की ही राजनीति सत्ता रही, आंध्रप्रदेश में भी कांग्रेसी सरकारें ही बनती रहीं। फिर अकस्मात आंध्रप्रदेश की राजनीति में तेलगु फिल्मों के भगवान एनटीआर का उदय हुआ। उन्होंने 1982 में अपनी पार्टी तेलगुदेशम बनायी और कांग्रेस की जड़ें हिला दीं।

तब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी और इंदिरा_गांधी प्रधानमंत्री थीं। दिसंबर 1982 के विधानसभा चुनावों में तेलगुदेशम ने कांग्रेस को पराजित कर दिया और 9 जनवरी 1983 को एनटी रामाराव आंध्रप्रदेश के पहले गैरकांग्रेसी मुख्यमंत्री बने। इंदिरा ने अपनी चालें चलीं और अगस्त 1984 में एनटी रामाराव की सरकार गिरा दी गयी, आंध्रप्रदेश में फिर से चुनाव घोषित हो गये।

एनटी रामाराव लोकप्रियता के शिखर पर थे, जनता की सहानुभूति भी उनके साथ थी और चुनावों में कांग्रेस की हार तय थी। ऐसे में एक दिन अचानक इंदिरा गांधी हैदराबाद में एआईएमआईएम के दफ्तर पहुंच गयीं। असदुद्दीन ओवैसी के मरहूम अब्बाजान सलाहुद्दीन ओवैसी तब की मुर्दा एआईएमआईएम के अध्यक्ष थे। इंदिरा ने सलाहुद्दीन ओवैसी के साथ खाना खाया और एनटी रामाराव के विजय रथ को रोकने के लिये आंध्र प्रदेश के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया।

इस गठबंधन से कांग्रेस को तो कोई फायदा नहीं हुआ, लेकिन एआईएमआईएम को पहली बार आंध्रप्रदेश में विधानसभा की 4 और लोकसभा की एक सीट पर जीत मिली। एनटी रामाराव भारी बहुमत से फिर आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री बने और अपना कार्यकाल पूरा किया।

एक मरी हुई देशविरोधी_पार्टी को कांग्रेस ने अपने कुकर्मों और निजी स्वार्थ की वजह से जिंदा कर दिया। जिस मरे_सांप को कांग्रेस ने जिंदा किया था, वही सांप अब कांग्रेस को डसने लगा है, तो कांग्रेसी बार-बार बिलबिला कर ओवैसी को बीजेपी का एजेंट बताने लगते हैं। उनके पिछवाड़े मारकर इंदिरा गांधी का कुकर्म याद जरूर दिलाइयेगा।

जय_हिन्द 🙏

Wednesday, September 8, 2021

कांग्रेस का रीढ़विहीन नेतृत्व बनाम भाजपा

ऐतिहासिक_तथ्य..

22 मई 2004 को देश के प्रधान पद से अटल_जी की अप्रत्याशित विदाई हुई। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह कोई अभूतपूर्व घटना नहीं थी, परंतु उसके बाद देश में जो कुछ हुआ वह अविस्मरणीय अवश्य है।

अटल जी के बाद रीढ़विहीन नेतृत्व में रिमोट से चलने वाली कांग्रेसी_सरकारें केंद्र की सत्ता में आयीं जिसका दुष्परिणाम यह हुआ कि एक के बाद एक घाव भारतमाता को लगते रहे। स्मरण करिये-

1. 15 अगस्त 2004, असम के धीमाजी में ब्लास्ट 18 मृत/40 घायल
2. 5 जुलाई 2005, अयोध्या  5 मृत/26 घायल
3. 28 जुलाई 2005, जौनपुर RDX ब्लास्ट 13 मृत/50 घायल
4. 29 अक्टूबर 2005, दिल्ली सीरियल ब्लास्ट 70 मृत/250 घायल
5. 28 दिसंबर 2005, IIMS बंगलोर हमला 1 मृत/4 घायल
6. 7 मार्च 2006 वाराणसी में 3 बम धमाके, 28 मृत/104 घायल
7. 11 जुलाई 2006, मुंबई सीरियल ट्रेन ब्लास्ट 209 मृत/700 घायल
8. 8 सितंबर 2006, मालेगांव मस्जिद ब्लास्ट 37 मृत/125 घायल, (इसमें सिमी का हाथ था, लेकिन कांग्रेस ने इसे हिंदू आतंकवाद में बदला।)
9. 18 फरवरी 2007, समझौता ब्लास्ट 68 मृत/50 घायल, (इसमें लश्कर का हाथ लेकिन कांग्रेस ने इसे भी हिंदू आतंकवाद में बदलवाया।)
10. हैदराबाद मस्जिद ब्लास्ट, 16 मृत/100 घायल, (इसे भी कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद में बदलने की असफल कोशिश की।)
11. 14 अक्टूबर 2007, लुधियाना ब्लास्ट 6 मृत/22 घायल
12. 22 नवंबर 2007, यूपी के कई शहरों में ब्लास्ट 16 मृत/79 घायल
13. 1 जनवरी 2008, यूपी के रामपुर में CRPF कैंप ब्लास्ट 8 मृत/7 घायल
14. 13 मई 2008, जयपुर सीरियल ब्लास्ट 63 मृत/200 घायल
15. 25 जुलाई 2008, बैंगलोर ब्लास्ट 2 मृत/20 घायल
16. 26 जुलाई 2008, अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट 35 मृत/110 घायल
17. 13 सितंबर 2008, दिल्ली सीरियल ब्लास्ट 33 मृत/108 घायल
18. 27 सितंबर 2008, दिल्ली महरौली ब्लास्ट 3 मृत/33 घायल
19. 1 अक्टूबर 2008, अगरतला ब्लास्ट 4 मृत/100 घायल
20. 21 अक्टूबर 2008, इंफाल ब्लास्ट 17 मृत/50 घायल
21. 30 अक्टूबर 2008, असम ब्लास्ट 81 मृत/500 घायल
22. 26 नवंबर 2008, मुंबई आतंकी हमला 166 मृत/600 घायल
23. 1 जनवरी 2009, गौहाटी ब्लास्ट 6 मृत/67 घायल
24. 6 अप्रैल 2009, गौहाटी ब्लास्ट 7 मृत/62 घायल
25. 13 फरवरी 2010, पुणे जर्मन बेकरी ब्लास्ट 17 मृत/70 घायल
26. 7 दिसंबर 2010, वाराणसी सीरियल ब्लास्ट 3 मृत/36 घायल
27. 13 नवंबर 2011, मुंबई ब्लास्ट 26 मृत/126 घायल
28. 7 सितंबर 2011, दिल्ली हाईकोर्ट ब्लास्ट 17 मृत/180 घायल
29. 1 अगस्त 2012, पुणे ब्लास्ट मृत/घायल अज्ञात
30. 21 फरवरी 2013, हैदराबाद ब्लास्ट 18 मृत/131 घायल
31. 17 अप्रैल 2013, बंगलोर ब्लास्ट 14 घायल
32. 7 जुलाई 2013, बोधगया ब्लास्ट 6 घायल
33. 27 अक्तूबर 2013, पटना रैली में ब्लास्ट 8 मृत/85 घायल
34. 1 मई 2014, चेन्नई ट्रेन ब्लास्ट 2 मृत/14 घायल

इनके अतिरिक्त माओवादियों, नक्सलियों और कश्मीर आदि में आतंकियों द्वारा निरंतर घटनाएं की गयीं, उनमें मृत/घायलों के आंकड़े उपलब्ध ही नहीं हैं और बटला_हाउस जैसी घटनाएं भी हुईं जिसमें आतंकियों के मारे जाने पर कांग्रेसी_राजमाता को फूट-फूट कर रोना पड़ गया था।

आप भाजपा और मोदी के कितने भी विरोधी हों, लेकिन यह तो स्वीकार ही करना होगा (भले ही दिल पर पत्थर रख कर मानें) कि उनके प्रधान बनने के बाद आतंकी J&K से नीचे नहीं उतर पाये और 2014 के बाद से देश में कहीं भी कोई ब्लास्ट नहीं हुआ है।

तो.. हर बार सरकार चुनते समय सोचियेगा जरूर कि आपको आतंकियों की मौत पर रोने वाले चाहिये, या आतंकियों को उनकी मांद में घुसेड़ कर 72_सुअरों के पास दोजख में भेजने वाले चाहिये.?

जय_हिंद 🙏

Thursday, August 26, 2021

इस्लाम का गड़बड़झाला..

गजब का #गड़बड़झाला है..

अफगानिस्तान में मुसलमानों को कौन मार रहा है.?
सीरिया में मुसलमानों की हत्या कौन कर रहा है.?
यमन में मुसलमानों को कौन मार रहा है.?
इराक में मुसलमानों को कौन मार रहा है.?
लीबिया में, मिस्र में, सोमालिया में, बलूचिस्तान में और तमाम इस्लामिक देशों में मुसलमानों को कौन मार रहा है.?

क्या अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, लेबनान, यमन और मिस्र, सोमालिया वगैरह को बजरंग_दल या हिन्दू_महासभा ने बर्बाद किया है.? या वहां दंगे करने के लिये आरएसएस के लोग गये थे.?    

75 साल पहले 1946 तक विश्व में इस्लामी देशों की संख्या सिर्फ 6 थी। आज मुस्लिम देश 57 हो गये हैं, लेकिन इनमें से किसी एक में भी आज मुस्लिम सुरक्षित नहीं हैं।

बताया तो यही जाता है कि इस्लाम एक शांतिपूर्ण धर्म है और आसमानी किताब के मुताबिक तो दुनिया भी इस्लाम के साथ ही पैदा हुई थी। लेकिन पता नहीं क्यों जैसे-जैसे इस्लाम बढ़ता गया, दुनिया से शांति रहस्यमय रूप से से गायब होती गयी।

बौद्ध+हिन्दू= कोई समस्या नहीं,
हिन्दू+ईसाई= कोई समस्या नहीं,
हिन्दू+यहूदी= कोई समस्या नहीं,
ईसाई+नास्तिक= कोई समस्या नहीं,
नास्तिक+बौद्ध= कोई समस्या नहीं,
बौद्ध+सिख= कोई समस्या नहीं,
सिख+हिन्दू= कोई समस्या नहीं..

लेकिन

मुस्लिम+हिन्दू= समस्या
मुस्लिम+बौद्ध= समस्या
मुस्लिम+ईसाई= समस्या
मुस्लिम+Jews= समस्या
मुस्लिम+सिख= समस्या
मुस्लिम+Baha'is= समस्या
मुस्लिम+नास्तिक= समस्या
मुस्लिम+Atheists= समस्या
और
मुस्लिम+मुस्लिम= सबसे बड़ी समस्या..

अगर मुस्लिम बहुसंख्यक है, तो न वह सुखी है न किसी को सुखी रहने देगा-

मुस्लिम गाजा में सुखी नहीं,
मुस्लिम Egypt में सुखी नहीं,
मुस्लिम लीबिया में सुखी नहीं,
मुस्लिम मोरोक्को में सुखी नहीं,
मुस्लिम ईरान में, इराक में सुखी नहीं,
मुस्लिम सीरिया, लेबनान में सुखी नहीं,
मुस्लिम नाइजीरिया में, केन्या में, सूडान में सुखी नहीं..
और मुस्लिम यमन में, अफगानिस्तान में, पाकिस्तान में सुखी नहीं..

मुस्लिम सुखी वहां हैं, जहां वह कम संख्या में है-

मुस्लिम सुखी है आस्ट्रेलिया में,
मुस्लिम सुखी है इंग्लैंड में,
मुस्लिम सुखी है बेल्जियम में,
मुस्लिम सुखी है फ्रांस में,
मुस्लिम सुखी है इटली में
मुस्लिम सुखी है जर्मनी में,
मुस्लिम सुखी है स्वीडन में,
मुस्लिम सुखी है USA में,
मुस्लिम सुखी है कनाडा में,
मुस्लिम सुखी है नार्वे में,
मुस्लिम सुखी है नेपाल में..
और मुस्लिम सुखी है भारत में..

दरअसल मुसलमान उन्हीं देशों में सुखी हैं जो इस्लामिक देश नहीं है, लेकिन विडम्बना यह है कि वो उन्ही देशों को लगातार दोषी भी ठहराते रहते हैं और वहां की लीडरशिप को बदलने की कोशिश में लगे रहते हैं। इसके लिये वह हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं और उनकी आसमानी_किताब इन सभी जायज_नाजायज हथकंडों को जिहाद कहते हुए इसे परमिट भी करती है।

UNO के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार इस समय विश्व में 1687 इस्लामिक_आतंकवादी संगठन हैं, जिनके दम पर यह शांतिदूत दुनिया को बदलना चाहते हैं। टॉप 15 नमूने देखिये-

1. ISIS
2. अलकायदा
3. तालिबान
4. हमास
5. हिज्बुल मुजाहिदीन
6. बोको हरम
7. Al Nusra
8. अबू स्याफ
9. अल बदर
10. मुस्लिम ब्रदरहुड
11. लश्कर-ए-तैयबा
12. Palestine Liberation Front
13. Ansaru
14. जेमाह इस्लामिया
15.अब्दुल्ला आजम ब्रिगेड

क्या अभी भी समझाना होगा
कि असल समस्या कौन है और आतंकवाद_का_मजहब क्या है.?! 🤔

जानकारी_ही_बचाव है.. 🙏

Sunday, August 8, 2021

विपक्षी पार्टियां और राहुल गांधी का मंकी_एफर्ट..

एक बार जंगल में शेर के खिलाफ बगावत हो गयी, शेर से नाराज तमाम जानवर इकट्ठा हो गये और मौका अच्छा देख बन्दर उनका नेता बन गया। फिर जंगल में प्रचार होने लगा कि शेर अत्याचारी है और अब जंगल को बन्दर ही बचा सकता है.. 

फिर एक दिन शेर_विरोधी मार्च तय हुआ और सभी शेर विरोधी पोस्टर बैनर लेकर इकट्ठा हुए। तभी वहां शेर आ गया। जानवर डर गये और बंदर से बोले- "तुम हमारे नेता हो, हमें शेर से बचाओ.!" बन्दर भी पेड़ पर चढ़ कर इस डाल से उस डाल कूद-कूद कर खों-खों करने लगा, शेर चुपचाप मजे लेता रहा.! शेर के जाने के बाद जंगल के जानवरों ने बंदर से पूछा- "तुमने कुछ किया क्यों नहीं.?" बंदर ने ऐतिहासिक उत्तर दिया- "डाल-डाल कूद कर मैंने कितनी कोशिश की थी, मेरे एफर्ट में कोई कमी थी क्या.?"

भारत का विपक्ष भी लगातार मृतप्राय_कांग्रेस और वयस्क_बालक राहुल_गांधी के भरोसे कभी राफेल, कभी CAA और NRC, कभी एवार्ड वापसी, कभी किसान आंदोलन और अब पेगासस जैसे मंकी_एफर्ट्स से मोदी को हटाना चाह रहा है। विपक्ष समझ ही नहीं पा रहा है कि-

मुस्लिम_वोट_बैंक में दम होता, तो मई 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री न बने होते..
नफरत से भरे मुट्ठीभर_लेखकों और कवियों को मई 2014 के बाद विलाप भाव की कविता का पाठ करते हुए एवार्ड_वापसी और देश छोड़ने का ऐलान न करना पड़ता..
राफेल में दम होता, तो फिर 2019 में नरेंद्र मोदी दुबारा प्रधानमंत्री न बने होते..
NRC और CAA के दंगों में दम होता, तो किसान आंदोलन न होता..
और किसान_आंदोलन में दम होता, तो अब पेगासस जैसी बासी_कढ़ी फिर से न उबाली जा रही होती.. 

मेरे विचार से नरेंद्र_मोदी_वार्ड में भर्ती विपक्ष के सारे मरीजों को समझ लेना चाहिये कि मंकी_एफर्ट्स से देश की छवि खराब करते हुए अपना ईगो_मसाज तो किया जा सकता है, पर नरेंद्र मोदी जैसे जननायक को बानरी उछल कूद से पछाड़ पाना संभव नहीं है।   

चंद मुस्लिम वोटों के लिये "भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्ला, इंशा अल्ला.." या "तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा.." की मानसिकता में डूबे विपक्ष की पुलवामा में आतंकी कार्रवाई को भी मोदी की साजिश मानना, मोदी विरोध के उफान में चीन को अपना बाप मान लेना, सर्जिकल_स्ट्राइक और एयर_स्ट्राइक को फर्जी बताकर सबूत मांगना, अभिनंदन की वापसी को भी तिकड़म मानना.. सेना, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग सहित हर संवैधानिक_संस्था व जनता को भी भक्त तथा भाजपाई घोषित कर देना और कोरोना_काल में भी देश को गृहयुद्ध में झोंकने की कोशिश करना उसे निरंतर रसातल में ही ले जा रहा है।

अब देश ही नहीं, देश की राजनीति भी आमूल-चूल बदल चुकी है और जनता ने अपनी प्राथमिकताएं भी बदल ली हैं। जनता अब अपनी जरूरतें भी जानती है और अपनी महत्वाकांक्षाएं भी। तो उचित होगा कि सम्पूर्ण विपक्ष और कांग्रेस भी राहुल के मंकी_एफर्ट के खेल से बाहर निकल कर जमीनी स्तर पर जनता के बीच नहीं जाये और सकारात्मक राजनीति करे नहीं तो गगन_विहारी विपक्ष तो लगातार मोदी को और अधिक मजबूत ही बनाता दिख रहा है और 2024 में भी नरेंद्र का कुछ बिगाड़ पायेगा, ऐसा सम्भव नहीं लग रहा है।

🚩🇮🇳 #जय_हिंद 🇮🇳🚩