Thursday, April 29, 2021

कोरोना की सेकेंड वेव और मोदी

फिर से शुरुआत वहीं से करूंगा कि कोरोना है और शायद रहेगा भी सुगर, बीपी व अन्य कई बीमारियों की तरह.. शंका इस कोरोना की तथाकथित सेकेंड_वेव को लेकर हो रही है कि क्या यह भारत और भारत के वर्तमान शासन के विरुद्ध सुनियोजित षड्यंत्र तो नहीं है.?

एक पखवाड़े पहले तक मैं भी इसे सेकेंड वेव ही मानता था, लेकिन जब पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की स्थिति का आकलन किया तो आश्चर्य हुआ। हमारे पड़ोसी पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान या पूरे एशिया के किसी भी अन्य देश में कोई दूसरी लहर नहीं आयी, वहां आज भी स्थितियां पहले जैसी ही हैं। 

फिर यह सेकेंड वेव का बम भारत में ही क्यूं और कैसे फटा.? क्या इन सभी एशियाई देशों -जो चिकित्सा, स्वास्थ्य और अन्य उच्चतर सुविधाओं में हमसे कमतर ही हैं- के नागरिक भारतीयों से अधिक अनुशासित हैं.? क्या वे महामारी से बचने के लिए चौबीस घंटे मास्क पहने रहते हैं.? क्या उनकी भौगोलिक स्थिति भारत से भिन्न है.? फिर यह दूसरी लहर इन देशों को छू भी नहीं सकी और भारत को तोड़ रही है, क्यूं.? 

आईसीएमआर ने पहली वेव के समय कहा था कि भारत में करोड़ों लोगों को यह बीमारी हो गयी और उन्हें पता भी नहीं चला.. तो जब करोड़ों लोग तब इसे झेल गये, फिर उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बन गयी, तब दूसरी लहर इतनी खतरनाक कैसे हो गयी, और भारत में ही क्यों हुई.? 

उत्तर आसान नहीं तो बहुत कठिन भी नहीं है.. थोड़ा सा ध्यान इस महामारी के बाद की वैश्विक परिस्थितियों पर ले जाइये। दवा, वैक्सीन से लेकर अर्थव्यवस्था प्रबंधन तक.. सबमें ही भारत ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया था और UN से लेकर WHO तक हर कहीं भारत और मोदी की तारीफ के पुल बांधे जाने लगे थे। तो क्या चीन, पाकिस्तान और विश्व के स्वयम्भू मालिक देश इससे बहुत प्रसन्न हो गये होंगे.?

चीन आज भारत को मदद की बात कर रहा है, जबकि पिछली महामारी में वही घुसपैठ कर रहा था। पाकिस्तान जैसा चिरशत्रु जिसे खुद के खाने के लाले पड़े हैं, वह भी हमारी मदद की बात कर रहा है और अमेरिका व जर्मनी जैसे देश हमें वैक्सीन बनाने का कच्चा माल देने से मना कर रहे हैं।

असल कारण दूसरे ही हैं..

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में दुनिया की ताकतवर फार्मा लाॅबी, ऑयल लाॅबी और आर्म्स लॉबी ने इस महामारी, BlackLivesMatter तथा जॉर्ज फ्लाॅयड जैसे मुद्दों का मीडिया में भयानक उफान मचाकर ट्रंप को हरवा दिया, क्योंकि ट्रंप ने इन लॉबीज के सामने खड़े होने की हिमाकत की थी। हालांकि वो बाद में झुके, लेकिन तबतक देर हो चुकी थी।

न जानते हों तो जान लें, इन फार्मा कंपनियों का सालाना बिजनेस कम से कम 4 से 6 ट्रिलियन डॉलर का होता है, जिसमें से मोदी ने लगभग 1.25 ट्रिलियन डॉलर का इनका वैक्सीन बिजनेस छीन लिया, इसके अलावा 500 बिलियन डॉलर का PPE Kit और मास्क का बिजनेस भी लगभग जीरो कर दिया। तो भारत की मेडिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता कैसे.? हमेशा हाथ फैलाने वाला देश वैक्सीन बांटने वाला देश हो गया.? क्या यह आसानी से पचने वाली बात थी.? जर्मनी ने तो अपनी पीड़ा खुलकर जाहिर भी कर दी थी कि "ड्रग के क्षेत्र में भारत ने हमें कैसे पछाड़ दिया.?

कारण और भी हैं..

भारत ने वैश्विक आयल_लाबी के मुंह पर करारा तमाचा मारते हुए अगले 2-3 सालों में इलॅक्ट्रिक वाहनों के लिये 75 हजार से 1 लाख चार्जिंग स्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा है जिससे तेल की खपत 30% तक कम हो जायेगी। हम LCA लड़ाकू विमानों और ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात करने लगे हैं, क्या यह वैश्विक आर्म्स_लॉबी के लिये सुखद समाचार है.?

सभी परेशान हैं..मोदी इनकी राह का सबसे बड़ा कांटा है और वह ट्रंप की तरह झुक भी नहीं रहा है, तो क्या किया जाये.? लोकतांत्रिक देश में अंतिम और सबसे सशक्त हथियार है जनता का गुस्सा और अब देश व देश के बाहर के सारे मोदी विरोधी इसी अस्त्र को आजमाने में लगे हैं।

आज की तारीख में असम और बंगाल भारत के लिये कहीं न कहीं कश्मीर से भी अधिक महत्वपूर्ण हैं, न मानिये तो गूगल पर चिकन_नेक सर्च कर लीजिये फिर टीवी, न्यूजपेपर या सोशल मीडिया कहीं भी जाइये- असम और पश्चिम बंगाल में जनता मोदी की रैलियों और प्रचार को लेकर गुस्से में दिखायी जा रही है। कोई नहीं बताता कि पश्चिम बंगाल में डेढ़ करोड़ बांग्लादेशी व रोहिंग्या और असम में भी 40 लाख घुसपैठिये मेहमान बनाये जा चुके हैं और दीदी तथा गांधी जैसे लोग उनके आधार कार्ड भी बनवा चुके हैं।

फिर से कहूंगा कि कोरोना है और सतर्क रहिये, आपकी सरकार हर समय आपके साथ है। लेकिन इस चीनी बीमारी की दूसरी लहर का आतंक मोदी को हर मोर्चे पर विफल दिखाने और देश में सिविल_वार करवाने के लिये फैलाया जा रहा है। यह चीन और भारत में छिपे बैठे उसके स्लीपर सेल -वामपंथियों और अब कांग्रेसियों- का भी खतरनाक खेल है। विपक्षनीत सरकारों की मोदी सरकार के विरुद्ध महामारी सम्बन्धी नीच राजनीति और मीडिया का 24x7 लाशें व ऑक्सीजन की कमी दिखाना इसी घिनौने षड्यंत्र का एक हिस्सा है..

एक ही मां सैकड़ों की मां बन कर हजारों बार बिना आक्सीजन के कैसे मर रही है.? भीड़ केवल शमशान में ही क्यों दिख रही है.? एक ही खाली आक्सीजन सिलिंडर तमाम जगह क्यूं दिखायी दे रहा है.? अचानक ही किसान फिर से दिल्ली में क्यूं घुसने लगे हैं.?

क्रोनोलॉजी समझिये.. यह एक और टूल किट है जो फिर से सक्रिय हुई है। जैसे ही महाराष्ट्र में वसूली कांड खुला और मोदी बंगाल जीतते लगे, सबकी फट गयी कि अब क्या होगा.? और महामारी फिर से प्रकट हो गयी। हारे हुए नकारा लोगों ने अब अपना गैंग बना लिया है जो लगातार ऐसे षड्यंत्र करते ही रहेंगे और थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद यह लड़ाई अभी चलती ही रहेगी, जबतक हम-आप ऐसे देशद्रोहियों को उनके अंतिम अंजाम तक पहुंचा कर समाप्त नहीं कर देंगे..और यह करना ही होगा, अगर अपनी अगली पीढ़ी को फिर से गुलाम नहीं बनाना है तो..

मेरे विचार से पांच_राज्यों के आने वाले चुनाव_परिणाम स्पष्ट संकेत देंगे कि मोदी भी ट्रम्प जैसे अंजाम की ओर चल पड़े हैं, या संघर्ष में अभी भी हमारी अगुआई करेंगे.?! 

जय_हिंद

Friday, April 16, 2021

कोरोना और हमारी मानसिक दृढ़ता..

यह कटु तथा स्थापित सत्य है कि कोरोना है, लगभग सबको है और शायद रहेगा भी। परंतु कोरोना से जितना डरने की आवश्यकता है, उससे कहीं अधिक इससे सावधान रहने की भी जरूरत है और इसके लिये कुछ भ्रांतियों का निराकरण आवश्यक है।

अमेरिका में मृत्युदंड प्राप्त एक कैदी पर वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया.. उसे बताया गया कि उसे फांसी देने की बजाय कोबरा से डसवा कर मारा जायेगा। नियत दिन पर उसके सामने एक भयानक विषधर किंग कोबरा लाया गया और कैदी की आंखों पर पट्टी बांधकर कुर्सी पर बैठा दिया गया। कैदी अपनी निश्चित मृत्यु की प्रतीक्षा में बैठा था तभी उसे एक साधारण सेफ्टी पिन चुभो दी गयी।
आश्चर्य, 2 सेकेंड में ही कैदी की तड़प कर मृत्यु हो गयी। तमाम वैज्ञानिक तब और आश्चर्यचकित रह गये जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर में कोबरा का जहर न्यूरोटॉक्सिन पाया गया।

अब प्रश्न यह उठा कि साधारण पिन से कैदी के शरीर में  विष कहां से आया जिससे कैदी की मृत्यु हुई.? विस्तृत जांच के बाद पाया गया कि वह घातक विष मानसिक तनाव और भय के कारण स्वयं कैदी के शरीर ने ही उत्पन्न किया था।

कथासार यह है कि हमारा शरीर हमारी अपनी मानसिक स्थिति के अनुसार स्वतः पॉजिटिव और निगेटिव एनर्जी उत्पन्न करता है और तदनुसार ही हमारे शरीर में हार्मोंस पैदा होते हैं।  लगभग 90% बीमारियों का मूल कारण नकारात्मक विचारों से उत्पन्न निगेटिव एनर्जी ही होती है, इसी प्रकार सकारात्मक विचार पॉजिटिव एनर्जी उत्पन्न करते हैं जो रोगों से लड़ने में सहायक होती है। कई बार रोगी अपने विश्वसनीय डॉक्टर के- "कोई चिंता की बात नहीं है.." कह देने भर से ही स्वस्थ अनुभव करने लगता है, यह उसका डॉक्टर के प्रति विश्वास -सकारात्मक विचार- ही होता है।

तो.. कोरोना को मन से न लगायें और आंकड़ों पर न जायें। टीवी, न्यूजपेपर्स या कहीं और से कोरोना सम्बन्धी खबरें देखने, पढ़ने या पता करने से परहेज करें, क्योंकि जितनी जानकारी आपको चाहिये थी वह आप जान चुके हैं, इससे अधिक जानकारी की आपको कोई आवश्यकता नहीं हैं।

ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि इस महामारी में नगण्य लोगों की मृत्यु घर पर हुई है। लगभग सभी अस्पताल में ही मरे हैं और वो केवल कोरोना से ही नहीं, बल्कि इसलिये मरे हैं क्योंकि उन्हें अन्य बीमारियां भी थीं, जिनका मुकाबला वो नहीं  कर सके। इसमें भी अस्पताल का वातावरण और उससे उत्पन्न मन का भय -नकारात्मक उर्जा- प्रमुख कारण है।

5 से 80 वर्ष तक के लगभग सारे लोग निगेटिव हो चुके हैं, 65 प्रतिशत लोग व्यवस्थित हैं और देश में कोरोना वैक्सिनेशन का काम तेजी से चल रहा है। इसलिये मास्क का प्रयोग करें, स्वच्छता रखें और अपने विचार सकारात्मक रखें। दृढ़ विश्वास रखें और दूसरों को भी विश्वास दिलायें कि यह समय बीत जायेगा और अतिशीघ्र सब ठीक हो जायेगा..! 👍

#Be_Positive, #Be_Healthy 💐

Thursday, March 11, 2021

बंगाल का चुनावी खेला..

#चुनावी_खेला..

1977 में #कांग्रेस के तत्कालीन राजकुमार संजय_गांधी अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। जनता उनसे बहुत नाराज थी और संजय गांधी को भी इसका पता था। ऐसे में जाने-माने विश्व_प्रसिद्ध पहलवान दारा_सिंह -जिनकी लोकप्रियता उस समय चरम पर थी और देश के ग्रामीण क्षेत्रों में तो उन्हें महामानव माना जाता था- को उनके पक्ष में जनसभा के लिये बुलाया गया। नाराज जनता ने दारा सिंह का इतना उग्र विरोध किया कि दारा सिंह अपना आपा खोकर मंच से कूद कर जनता की तरफ डंडा लेकर दौड़ पड़े थे, पुलिस को किसी तरह उन्हें भीड़ से बचाकर ले जाना पड़ा था। 

इसके बाद एक दिन चुनाव प्रचार कर लौट रहे संजय गांधी की कार पर अचानक #विरोधियों द्वारा गोलियां बरसा दी गयीं.. यह चुनावी_स्टंट रचा तो जनता की सहानुभूति बटोरने के लिये गया था, लेकिन इसका प्रभाव उल्टा ही पड़ा और संजय गांधी को उस चुनाव में 76 प्रतिशत के भारी अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा था।

बंगाल में ममता_बनर्जी के साथ हुई घटना भी लगभग उसी तरह का चुनावी_ड्रामा ही है। पिटे हुए मोहरे प्रशांत_किशोर की सलाह पर ममता द्वारा अपनी खुद की गलती से हुई एक सामान्य दुर्घटना को जानलेवा_हमला बताना बंगाल के चुनावी_खेला का अबतक का सबसे विकृत प्रसंग ही कहा जा सकता है..

और ऐसा खेला ममता आज से नहीं खेल रही हैं.. पता नहीं कितनों को याद होगा, 1975 में जब लोकनायक जय प्रकाश नारायण कलकत्ता में सम्पूर्ण_क्रांति की यात्रा पर थे, तब एक लड़की ने अचानक सड़क पर उनकी कार रोक दी थी और कार की छत और बोनट पर आसुरी_नृत्य किया था..यह नृत्यांगना ममता बनर्जी ही थीं। उनके इस नृत्य ने तब के अखबारों में 3-4 दिन तक सुर्खियां बटोरी थीं और यहीं से उनकी उद्दंड तथा अराजक राजनीतिक यात्रा का प्रारंभ भी हुआ था।

लेकिन ममता भूल रही हैं कि संचार क्रांति के बाद के वर्तमान युग में जब कि विश्व के एक छोर से खबरें चंद सेकेंड में दूसरे छोर तक पहुंच जाती हैं, ऐसे हथकंडों की पोल खुलते न देर लगती है, न इनका ज्यादा असर होता है।

भाजपा ने और आश्चर्यजनक रूप से कांग्रेस ने भी ममता के साथ हुई घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उचित होगा कि इस घटना की त्वरित जांच कर परिणाम से जनता को भी अवगत कराया जाये, ताकि जनता हिंसा से नहीं बल्कि वोट से चुनाव में अपना #खेला खेले और इन ढोंगियों को वक्त रहते सबक सिखा सके..

जय_हिंद 🚩

Thursday, December 3, 2020

सब्सिडी वाले करोड़पति किसान

किसान_आंदोलन..😢

सर्वप्रथम यह स्पष्ट कर दूं कि मैं किसान परिवार से ही हूं और खेती_किसानी के बारे में एक आम किसान से कहीं ज्यादा जानता हूं..और इसीलिये सीना ठोंक कर लिख रहा हूं..

पहले तो किसानों को मिलने वाली सरकारी मदद (सब्सिडी) के बारे में-

● बीज_खरीद पर सब्सिडी
● कृषि_उपकरण खरीद पर सब्सिडी
● खाद के लिये सब्सिडी
● ट्रेक्टर और ट्राली खरीद पर सब्सिडी
● पशुधन खरीद पर सब्सिडी
● खेती में अन्य खर्च के #कर्ज पर सब्सिडी
● जैविक_खेती पर सब्सिडी
● सोलर एनर्जी पर सब्सिडी
● सिंचाई के लिये बिजली/डीजल पर सब्सिडी
● बागवानी पर सब्सिडी
● सिंचाई पाईप लाईन पर सब्सिडी
● स्वचालित कृषि पद्धति अपनाने पर सब्सिडी
● जैव उर्वरक खरीद पर सब्सिडी

इसके बाद-

● फसल बीमा
● किसान क्रेडिट कार्ड
● नई तरह की खेती करने वालो को फ्री प्रशिक्षण
● कृषि विषय पर पढ़ने वाले बच्चों को अनुदान

फिर..
★ सूखे पर मुआवजा।
★ बाढ़ पर मुआवजा।
★ टिड्डी-कीट जैसी आपदा पर मुआवजा।
★ शौचालय निर्माण फ्री
★ पीने का साफ पानी फ्री
★ घर से गन्दे पानी की निकासी फ्री
★ बच्चों को पढ़ने खेलने की ट्रेनिंग फ्री

■ साल में 6000 रुपये खाते में
और
■ और..सरकार बदलते ही सारे कर्ज माफ 👍

अगर इतने के बाद भी इस देश के किसानों को सरकार से अपना हक नहीं मिल रहा, तो कब और कैसे मिलेगा ये परमात्मा भी नहीं बता सकेंगे।

कितनों को पता है कि जिस MSP के खत्म हो जाने का हौवा खड़ा कर के पंजाब और हरियाणा के तथाकथित किसान आज आंदोलन कर रहे हैं, वह MSP कभी भी देश के सभी किसानों के लिये एक समान नहीं रही है.? 

इस साल भी यूपी बिहार के किसानों को अपना धान 1100 से 1300 रू. प्रति क्विंटल में बेचना पड़ा है जबकि पंजाब और हरियाणा के किसानों को प्रति क्विंटल धान के 1888 रू. मिले हैं, मतलब इस पर भी सब्सिडी.?!

👉 यह सत्य है कि पंजाब हरियाणा के किसान गेहूं और धान की पैदावार देश के अन्य किसानों से अधिक करते हैं, लेकिन कटु सत्य यह भी है कि इस गेहूं और धान की गुणवत्ता निम्न कोटि की होती है। यह अपना गेंहू 1800 में सरकार को बेंचकर खुद 2400 में मध्यप्रदेश का गेहूं खरीदकर खाते हैं, खुली प्रतिस्पर्धा में इनकी उपज कोई नहीं खरीदेगा। 

यही भय इनको नये कृषि कानूनों का विरोध करने पर मजबूर कर रहा है क्योंकि नये कृषि कानून किसान को अपनी उपज कहीं भी खुले_बाजार में बेंचने की सुविधा देते हैं और बाजार में तो घटिया माल नहीं बल्कि क्वालिटी ही टिकती और बिकती है..

इन सब्सिडी वाले करोड़पति_किसानों से कहीं बेहतर तो देश के तमाम दिहाड़ी मजदूर, रेहड़ी वाले, छोटे वकील, पटरी दुकानदार, पढ़े-लिखे बेरोजगार, ड्राइवर और कचरा बीनकर पेट पालने वाले हैं जो रोज मेहनत करते हैं, लेकिन न रोते हैं न सरकार से सब्सिडी मांगते हैं न ही ब्लैकमेलिंग करने के लिये धरना और आंदोलन करते हैं..😢

जो सच है, वही लिखा है..किसी को बुरा लगे तो #SORRY..😢

Wednesday, November 11, 2020

कांग्रेस और न्यायपालिका का दुर्योग

नरेन्द्र_मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब केंद्र की कांग्रेस सरकार ने उनको गुजरात में ही घेरने के लिये न्यायपालिका के साथ एक घिनौना_प्रयोग किया था।

किसी भी राज्य के हाईकोर्ट में जज बनने के लिए दो योग्यताएं होनी जरूरी होती हैं- 1. किसी हाईकोर्ट में 10 साल तक वकालत की प्रैक्टिस किया हो और 2.  किसी राज्य का महाधिवक्ता या सहायक महाधिवक्ता हो।

कांग्रेस सरकार ने हाईकोर्ट जज के लिये निर्धारित दूसरी_योग्यता को सीढ़ी बनाया। बिहार में लालू यादव की पार्टी राजद के एक नेता आफताब_आलम को बिहार सरकार का महाधिवक्ता और हिमांचल प्रदेश में कांग्रेसी मुख्यमंत्री वीरभद्र_सिंह की बेटी अभिलाषा_कुमारी को हिमांचल सरकार का महाधिवक्ता बना दिया गया फिर कुछ समय बाद ये आफताब आलम साहब और अभिलाषा कुमारी जी अद्भुत_कोलोजियम_सिस्टम से गुजरात हाईकोर्ट में जज बना दिये गये। इनके अतिरिक्त इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुख्यात जस्टिस_माथुर को भी गुजरात हाईकोर्ट का जज बना कर भेज दिया गया।

अब कांग्रेस के असली खिलाड़ी तीस्ता_जावेद_सीतलवाड़ और शबनम_हाशमी जैसे लोग मैदान में आ गये। केंद्र की मनमोहन सरकार द्वारा तीस्ता जावेद सीतलवाड़ के एनजीओ सबरंग को 80 करोड़ और शबनम हाशमी के एनजीओ को भी 60 करोड़ से ज्यादा अनुदान मोदी के विरुद्ध माहौल बनाने और कानूनी पचड़े में फंसाने के लिये दिया गया।

अब खेल देखिये- तीस्ता जावेद सीतलवाड़ और शबनम हाशमी मोदी के खिलाफ जो भी याचिका करते, वह या तो जस्टिस आफताब आलम की बेंच में जाती थी या जस्टिस अभिलाषा कुमारी या फिर जस्टिस माथुर की बेंच में जाती थी जिसपर यह लोग इनके मनमाफिक फैसले सुना देते थे। मोदी के विरुद्ध इनके द्वारा दायर एक भी याचिका गुजरात हाईकोर्ट के किसी दूसरे जस्टिस की बेंच में नहीं जाती थी।

फिर गुजरात हाईकोर्ट के फैसलों के खिलाफ गुजरात सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करने लगी, तब कांग्रेस सरकार ने एक कमाल और किया- जस्टिस आफताब आलम को गुजरात हाईकोर्ट से प्रमोट करके सुप्रीम_कोर्ट का जज बना दिया गया। फिर वहां भी यही खेल शुरू हो गया कि शबनम हाशमी और तीस्ता जावेद की याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट के फैसलों पर दायर की गयी गुजरात सरकार की हर याचिका सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ जस्टिस आफताब आलम की ही बेंच में जाती थी।

वो तो भला हो गुजरात हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस_एमबी_सोनी का जिन्होंने गुजरात से दिल्ली तक बैठे इन कांग्रेसी जजों के तमाम फैसलों का विश्लेषण किया और सुस्पष्ट तथ्यों के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और राष्ट्रपति को भेजकर इन फैसलों की समीक्षा और इसकी जांच कराने का आग्रह किया कि जब सिस्टम के अनुसार कोई याचिका पहले सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जाती है फिर कंप्यूटराइज्ड तरीके से किसी भी जज की बेंच को रिफर हो जाती है, तब यह कैसे संभव हो रहा है कि गुजरात सरकार और मोदी के खिलाफ जितनी भी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में की जा रही है वह सारी की सारी जस्टिस आफताब आलम की बेंच में ही जा रही हैं.?

मामला खुल जाने पर थुक्का_फजीहत और राष्ट्रपति व सीजेआई के हस्तक्षेप के बाद अंततः न्यायपालिका में बैठे कांग्रेसी चमचों ने सेरेंडर किया और महाकाल की कृपा से मोदी बेदाग बचे।

आज कांग्रेस_कृपा से बनी महाराष्ट्र सरकार वही चाल-चरित्र अपना चुकी है और अर्णव गोस्वामी के साथ वही पुराना खेल खेल रही है। सेशन से हाईकोर्ट तक ये छद्म_कांग्रेसी सफल भी रहे हैं, लेकिन शायद अब सुप्रीम कोर्ट में कोई जस्टिस आफताब आलम नहीं है, तो..आशा है वहां वही होगा जिसे सही मायने में न्याय कहा जायेगा।

जय_हिन्द

Wednesday, August 5, 2020

राम मंदिर

भूमि_पूजन सम्पन्न हुआ और मंदिर_निर्माण का मार्ग पूर्णतः प्रशस्त हुआ..परन्तु इसी शुभ घड़ी में कुछ शंकाओं का समाधान भी परम आवश्यक है-

अयोध्या में मन्दिर बन किसका रहा है.?

क्या भगवान श्रीराम  का.?

नहीं, श्रीराम तो स्वयं ब्रह्म हैं, शाश्वत हैं, अजन्मा हैं, परमात्म स्वरूप हैं, समस्त चराचर- सूर्य, चन्द्र, नक्षत्र, पृथ्वी, जल, आकाश, अंतरिक्ष, मनुष्य, पशु-पक्षियों, और जगत के कण-कण में व्याप्त हैं। अयोध्या और वहां के अन्य मंदिरों में तो वह हैं ही, समस्त विश्व ही उनका मन्दिर है.. तो उन्हें नवीन मंदिर की क्या आवश्यकता है.?

तो क्या राजा_रामचन्द्र जी का.? 

नहीं, क्योंकि पृथ्वी पर अनेक राजा, बड़े बड़े सम्राट आये और गये, सबको अपने भव्य मन्दिर और प्रासाद यहीं छोड़ कर जाना पड़ा और #राजा_राम ने तो वैसे भी स्वयं के लिये कुछ भी अलग से नहीं रखा था।

तो क्या भाजपा_के_श्रीराम का.?

नहीं, क्योंकि इस मंदिर के लिये विगत 500 वर्षों से लाखों लोगों ने संघर्ष किया है और अपने प्राणों की आहुति दी है और आज भी विश्वभर से करोड़ों करोड़ हिंदू इस मंदिर निर्माण के लिये प्राणपण से जुड़े और जुटे हैं।

तो फिर यह मंदिर बन किसका रहा है.?

वस्तुतः यह मंदिर पुनर्निर्माण है शताब्दियों से रौंदी जा रही हिंदू_अस्मिता का, निरन्तर दमित हिंदू_गौरव तथा आत्मसम्मान का और आतताइयों द्वारा बेरहमी से कुचली गयी उदार सनातनी_गरिमा का..

यह मंदिर हिंदू_पुनर्जागरण का प्रतीक है, हिंदू_पुनरुत्थान की उद्घोषणा है और हिंदू_आत्मविश्वास के पुनः उठकर गगनचुंबी होने का सूचक है। यह अस्ताचलगामी प्राचीन सनातन सभ्यता के पुनः उदय होने का शंखनाद है और कोटि कोटि हिंदू- सिक्ख - जैन - बौद्ध बलिदानियों के लिये श्रद्धांजलि है..

जय_श्रीराम 🙏🏻💐👍🏻

Monday, July 13, 2020

कांग्रेस का अंधा आईना

कहते हैं आईना हमेशा असली शकल ही दिखाता है, मगर आईने को झुठलाना क्या होता है यह कोई कांग्रेस के अघोषित_मुखिया और देश के भविष्य के स्वघोषित_प्रधानमंत्री राहुल गांधी से पूछे..

कांग्रेस उजड़ती जा रही है..पार्टी के न केवल नये बल्कि अब तो पुराने नेता भी बोलने लगे हैं कि अब तो समझो, सनक और पिनक की जगह बुद्धि और विवेक से सोचो और कुछ तो ऐसा करो जिससे डूबती पार्टी थोड़ा बहुत उबर सके, लेकिन राहुल बदलने वाले नहीं। पार्टी उनसे है, वह पार्टी से नहीं इसलिये वो वही करेंगे और कहेंगे जो उनका मन करेगा। भाजपा वाले शायद इसीलिये दुआ करते रहते हैं कि "..न राहुल कभी कांग्रेस को छोड़ें न कांग्रेस राहुल को.."

पिछले एक महीने के राहुल के ट्वीट पढ़ लीजिये..लगभग पूरी दुनिया मान चुकी है कि गलवन प्रकरण में भारत ने चीन को झुका दिया है और कोविड से भी से केंद्र सरकार सभी राज्यों के साथ मिलकर मजबूती से लड़ रही है। लगभग सभी राजनीतिक दल जानते-समझते हैं कि इस समय न तो चीन न ही कोविड, किसी पर भी सरकार के विरूध्द बोलना उचित नहीं है। लेकिन राहुल गांधी.? उनके वक्तव्य तो उनकी अपनी ही पार्टी के नेता_विपक्ष को रास नहीं आते, बाकियों का भगवान ही जाने। सर्जिकल_स्ट्राइक और आर्टिकल_370 के समय भी कई बार राहुल अपने विचित्र बयानों से अपनी ही पार्टी को मुश्किल में डाल चुके हैं।

आज राजस्थान और इसके पहले कर्नाटक और मध्यप्रदेश जिस स्थिति में पहुंचे, उसके लिये  सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व-आलाकमान- ही जिम्मेदार है। आरोप तो हमेशा लगाया गया, लगाया जा भी रहा है कि भाजपा तोड़फोड़ करा रही है लेकिन कांग्रेसी नेताओं में आपसी खींचतान कितनी है ये किसी से छिपा है क्या.? मध्यप्रदेश में कमलनाथ, दिग्विजय और ज्योतिरादित्य के बीच कितनी खाईं थी कांग्रेस का आला कमान अनजान था क्या.? और राजस्थान में सचिन पायलट के घोषित मुख्यमंत्री होने के बाद भी गहलोत को मुख्यमंत्री बनाकर आग में घी आलाकमान ने ही तो डाला है।

कटु यथार्थ यह है कि इंदिरा_गांधी के बाद कांग्रेस में नेतृत्व_क्षमता समाप्त ही हो चुकी है। कोई भी पार्टी सशक्त नेतृत्व तथा स्पष्ट विचारधारा से ही आगे बढ़ती है और कांग्रेस इन दोनों से ही वंचित है और ऐसे में पार्टी को जोड़े रखने का अंतिम मंत्र बचता है- सत्ता..

स्पष्ट दिख रहा है कि कांग्रेस जैसे जैसे सत्ता से दूर होती जा रही है, उसमें और ज्यादा टूट-फूट खुद होती जा रही है जिसके लिये उसका नेतृत्व ही जिम्मेदार है। सचिन पायलट दिल्ली में बैठे हैं और आलाकमान उन्हें मना नहीं पा रहा है, क्या भाजपा ने मना किया है.? ज्योतिरादित्य 10 जनपथ पर टहलते रहे, दरवाजा नहीं खुला, क्या भाजपा ने रोका था.?

हकीकत यह है कि कांग्रेस एक_परिवार की परिधि से बाहर निकल ही नहीं पा रही है न वह परिवार उसे निकलने दे रहा है। राहुल ने लोकसभा चुनाव में अपनी असफलता स्वीकार तो की, लेकिन अब पर्दे के पीछे से रस्सी खींचकर पार्टी को नचाना चाह रहे हैं, सोनिया अस्वस्थ रहती हैं और शायद अपना आखिरी_चुनाव भी लड़ चुकी हैं। प्रियंका के बारे में भी शायद परिवार ने ही फैसला लेने में देर की, वैसे वह भी अब अपना करिश्मा खो चुकी हैं। तो कांग्रेस अब क्या करे.? किसके भरोसे आगे बढ़ने की सोचे.?

राज_परिवार तो शायद अब जागने की स्थिति में नहीं रहा, न ही पार्टी को मुक्त करने की सोचेगा ही..अब पार्टी ही जागे और इन्हें अलग_कर कोई नयी राह, नयी विचारधारा चुने तभी शायद कुछ उम्मीद हो सकती है..!

जयहिन्द 👍